महाभारत 3.150.25
परिवृत्तेऽहनि ततः प्रकीर्णहरिणे वनेकाञ्चनैर्विमलैः पद्मैर्ददर्श विपुलां नदीम्
parivṛtte'hani tataḥ prakīrṇahariṇe vanekāñcanairvimalaiḥ padmairdadarśa vipulāṃ nadīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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