महाभारत 3.150.27
तस्यां नद्यां महासत्त्वः सौगन्धिकवनं महत्अपश्यत्प्रीतिजननं बालार्कसदृशद्युति
tasyāṃ nadyāṃ mahāsattvaḥ saugandhikavanaṃ mahatapaśyatprītijananaṃ bālārkasadṛśadyuti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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