महाभारत 3.150.6
ममापि सफलं चक्षुः स्मारितश्चास्मि राघवम्मानुषं गात्रसंस्पर्शं गत्वा भीम त्वया सह
mamāpi saphalaṃ cakṣuḥ smāritaścāsmi rāghavammānuṣaṃ gātrasaṃsparśaṃ gatvā bhīma tvayā saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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