महाभारत 3.151.4
तत्रामृतरसं शीतं लघु कुन्तीसुतः शुभम्ददर्श विमलं तोयं शिवं बहु च पाण्डवः
tatrāmṛtarasaṃ śītaṃ laghu kuntīsutaḥ śubhamdadarśa vimalaṃ toyaṃ śivaṃ bahu ca pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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