महाभारत 3.151.6
वैडूर्यवरनालैश्च बहुचित्रैर्मनोहरैःहंसकारण्डवोद्धूतैः सृजद्भिरमलं रजः
vaiḍūryavaranālaiśca bahucitrairmanoharaiḥhaṃsakāraṇḍavoddhūtaiḥ sṛjadbhiramalaṃ rajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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