महाभारत 3.152.9
न हि याचन्ति राजान एष धर्मः सनातनःन चाहं हातुमिच्छामि क्षात्रधर्मं कथंचन
na hi yācanti rājāna eṣa dharmaḥ sanātanaḥna cāhaṃ hātumicchāmi kṣātradharmaṃ kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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