महाभारत 3.154.12न च राजावमन्तव्यो रक्षसा जात्वनागसिअणुरप्यपचारश्च नास्त्यस्माकं नराशनna ca rājāvamantavyo rakṣasā jātvanāgasiaṇurapyapacāraśca nāstyasmākaṃ narāśanaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें