महाभारत 3.154.45
इत्येवमुक्त्वा तौ वीरौ स्पर्धमानौ परस्परम्बाहुभिः समसज्जेतामुभौ रक्षोवृकोदरौ
ityevamuktvā tau vīrau spardhamānau parasparambāhubhiḥ samasajjetāmubhau rakṣovṛkodarau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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