महाभारत 3.154.56
ततः संहृत्य मुष्टिं तु पञ्चशीर्षमिवोरगम्वेगेनाभ्यहनद्भीमो राक्षसस्य शिरोधराम्
tataḥ saṃhṛtya muṣṭiṃ tu pañcaśīrṣamivoragamvegenābhyahanadbhīmo rākṣasasya śirodharām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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