महाभारत 3.154.59
तस्य गात्राणि सर्वाणि चूर्णयामास पाण्डवःअरत्निना चाभिहत्य शिरः कायादपाहरत्
tasya gātrāṇi sarvāṇi cūrṇayāmāsa pāṇḍavaḥaratninā cābhihatya śiraḥ kāyādapāharat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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