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महाभारत 3.154.9
येऽन्ये केचिन्मनुष्येषु तिर्यग्योनिगता अपिगन्धर्वयक्षरक्षांसि वयांसि पशवस्तथामनुष्यानुपजीवन्ति ततस्त्वमुपजीवसि
ye'nye kecinmanuṣyeṣu tiryagyonigatā apigandharvayakṣarakṣāṃsi vayāṃsi paśavastathāmanuṣyānupajīvanti tatastvamupajīvasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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