महाभारत 3.155.12
क्वचिज्जगाम पद्भ्यां तु राक्षसैरुह्यते क्वचित्तत्र तत्र महातेजा भ्रातृभिः सह सुव्रतः
kvacijjagāma padbhyāṃ tu rākṣasairuhyate kvacittatra tatra mahātejā bhrātṛbhiḥ saha suvrataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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