महाभारत 3.155.27
नानाद्रुमनिरोधेषु वसन्तः शैलसानुषुपर्वतं विविशुः श्वेतं चतुर्थेऽहनि पाण्डवाः
nānādrumanirodheṣu vasantaḥ śailasānuṣuparvataṃ viviśuḥ śvetaṃ caturthe'hani pāṇḍavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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