महाभारत 3.155.29
ते समासाद्य पन्थानं यथोक्तं वृषपर्वणाअनुसस्रुर्यथोद्देशं पश्यन्तो विविधान्नगान्
te samāsādya panthānaṃ yathoktaṃ vṛṣaparvaṇāanusasruryathoddeśaṃ paśyanto vividhānnagān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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