महाभारत 3.155.30
उपर्युपरि शैलस्य गुहाः परमदुर्गमाःसुदुर्गमांस्ते सुबहून्सुखेनैवाभिचक्रमुः
uparyupari śailasya guhāḥ paramadurgamāḥsudurgamāṃste subahūnsukhenaivābhicakramuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें