महाभारत 3.155.36उपेतमन्यैश्च तदा मृगैर्मृदुनिनादिभिःते गन्धमादनवनं तन्नन्दनवनोपमम्upetamanyaiśca tadā mṛgairmṛduninādibhiḥte gandhamādanavanaṃ tannandanavanopamamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें