महाभारत 3.155.57
सिन्धुवारानथोद्दामान्मन्मथस्येव तोमरान्सुवर्णकुसुमाकीर्णान्गिरीणां शिखरेषु च
sindhuvārānathoddāmānmanmathasyeva tomarānsuvarṇakusumākīrṇāngirīṇāṃ śikhareṣu ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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