महाभारत 3.156.12
स्वे स्वे किल कुले जाते पुत्रे नप्तरि वा पुनःपितरः पितृलोकस्थाः शोचन्ति च हसन्ति च
sve sve kila kule jāte putre naptari vā punaḥpitaraḥ pitṛlokasthāḥ śocanti ca hasanti ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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