महाभारत 3.156.22ईषच्चपलकर्माणं मनुष्यमिह भारतद्विषन्ति सर्वभूतानि ताडयन्ति च राक्षसाःīṣaccapalakarmāṇaṃ manuṣyamiha bhāratadviṣanti sarvabhūtāni tāḍayanti ca rākṣasāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें