महाभारत 3.156.25
अप्सरोभिः परिवृतः समृद्ध्या नरवाहनःइह वैश्रवणस्तात पर्वसंधिषु दृश्यते
apsarobhiḥ parivṛtaḥ samṛddhyā naravāhanaḥiha vaiśravaṇastāta parvasaṃdhiṣu dṛśyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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