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महाभारत 3.157.13
आजग्मुः पाण्डवान्द्रष्टुं सिद्धात्मानो यतव्रताःतैस्तैः सह कथाश्चक्रुर्दिव्या भरतसत्तमाः
ājagmuḥ pāṇḍavāndraṣṭuṃ siddhātmāno yatavratāḥtaistaiḥ saha kathāścakrurdivyā bharatasattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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