महाभारत 3.157.45
सा लोहितमहावृष्टिरभ्यवर्षन्महाबलम्कायेभ्यः प्रच्युता धारा राक्षसानां समन्ततः
sā lohitamahāvṛṣṭirabhyavarṣanmahābalamkāyebhyaḥ pracyutā dhārā rākṣasānāṃ samantataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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