महाभारत 3.157.55
एवमाभाष्य तान्सर्वान्न्यवर्तत स राक्षसःशक्तिशूलगदापाणिरभ्यधावच्च पाण्डवम्
evamābhāṣya tānsarvānnyavartata sa rākṣasaḥśaktiśūlagadāpāṇirabhyadhāvacca pāṇḍavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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