महाभारत 3.157.59
प्रत्यहन्यन्त ते सर्वे गदामासाद्य सायकाःन वेगं धारयामासुर्गदावेगस्य वेगिताः
pratyahanyanta te sarve gadāmāsādya sāyakāḥna vegaṃ dhārayāmāsurgadāvegasya vegitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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