महाभारत 3.157.64
तां प्रगृह्योन्नदन्भीमः सर्वशैक्यायसीं गदाम्तरसा सोऽभिदुद्राव मणिमन्तं महाबलम्
tāṃ pragṛhyonnadanbhīmaḥ sarvaśaikyāyasīṃ gadāmtarasā so'bhidudrāva maṇimantaṃ mahābalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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