महाभारत 3.157.70
तं प्रेक्ष्य निहतं भूमौ हतशेषा निशाचराःभीममार्तस्वरं कृत्वा जग्मुः प्राचीं दिशं प्रति
taṃ prekṣya nihataṃ bhūmau hataśeṣā niśācarāḥbhīmamārtasvaraṃ kṛtvā jagmuḥ prācīṃ diśaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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