महाभारत 3.158.36तमासीनं महाकायाः शङ्कुकर्णा महाजवाःउपोपविविशुर्यक्षा राक्षसाश्च सहस्रशःtamāsīnaṃ mahākāyāḥ śaṅkukarṇā mahājavāḥupopaviviśuryakṣā rākṣasāśca sahasraśaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें