महाभारत 3.158.57
त्वं चाप्येभिर्हतैः सैन्यैः क्लेशं प्राप्स्यसि दुर्मतेतमेव मानुषं दृष्ट्वा किल्बिषाद्विप्रमोक्ष्यसे
tvaṃ cāpyebhirhataiḥ sainyaiḥ kleśaṃ prāpsyasi durmatetameva mānuṣaṃ dṛṣṭvā kilbiṣādvipramokṣyase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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