महाभारत 3.159.4
य एवं वर्तते पार्थ पुरुषः सर्वकर्मसुस लोके लभते वीर यशः प्रेत्य च सद्गतिम्
ya evaṃ vartate pārtha puruṣaḥ sarvakarmasusa loke labhate vīra yaśaḥ pretya ca sadgatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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