महाभारत 3.16.7सोष्ट्रिका भरतश्रेष्ठ सभेरीपणवानकासमित्तृणकुशा राजन्सशतघ्नीकलाङ्गलाsoṣṭrikā bharataśreṣṭha sabherīpaṇavānakāsamittṛṇakuśā rājansaśataghnīkalāṅgalāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें