महाभारत 3.160.11एतं पर्वतराजानं समुद्रं च महोदधिम्आवसन्वरुणो राजा भूतानि परिरक्षतिetaṃ parvatarājānaṃ samudraṃ ca mahodadhimāvasanvaruṇo rājā bhūtāni parirakṣatiइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें