महाभारत 3.160.12
उदीचीं दीपयन्नेष दिशं तिष्ठति कीर्तिमान्महामेरुर्महाभाग शिवो ब्रह्मविदां गतिः
udīcīṃ dīpayanneṣa diśaṃ tiṣṭhati kīrtimānmahāmerurmahābhāga śivo brahmavidāṃ gatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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