महाभारत 3.160.17
यमाहुः सर्वभूतानां प्रकृतेः प्रकृतिं ध्रुवम्अनादिनिधनं देवं प्रभुं नारायणं परम्
yamāhuḥ sarvabhūtānāṃ prakṛteḥ prakṛtiṃ dhruvamanādinidhanaṃ devaṃ prabhuṃ nārāyaṇaṃ param
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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