महाभारत 3.160.8
यमस्तु राजा धर्मात्मा सर्वप्राणभृतां प्रभुःप्रेतसत्त्वगतीमेतां दक्षिणामाश्रितो दिशम्
yamastu rājā dharmātmā sarvaprāṇabhṛtāṃ prabhuḥpretasattvagatīmetāṃ dakṣiṇāmāśrito diśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें