महाभारत 3.160.9एतत्संयमनं पुण्यमतीवाद्भुतदर्शनम्प्रेतराजस्य भवनमृद्ध्या परमया युतम्etatsaṃyamanaṃ puṇyamatīvādbhutadarśanampretarājasya bhavanamṛddhyā paramayā yutamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें