महाभारत 3.163.4
सम्यग्वा ते गृहीतानि कच्चिदस्त्राणि भारतकच्चित्सुराधिपः प्रीतो रुद्रश्चास्त्राण्यदात्तव
samyagvā te gṛhītāni kaccidastrāṇi bhāratakaccitsurādhipaḥ prīto rudraścāstrāṇyadāttava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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