महाभारत 3.164.22भूयश्चैव तु तप्तव्यं तपः परमदारुणम्उवाच भगवान्सर्वं तपसश्चोपपादनम्bhūyaścaiva tu taptavyaṃ tapaḥ paramadāruṇamuvāca bhagavānsarvaṃ tapasaścopapādanamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें