महाभारत 3.164.54
विश्वावसोश्च मे पुत्रश्चित्रसेनोऽभवत्सखास च गान्धर्वमखिलं ग्राहयामास मां नृप
viśvāvasośca me putraścitraseno'bhavatsakhāsa ca gāndharvamakhilaṃ grāhayāmāsa māṃ nṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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