महाभारत 3.167.13
ततोऽहं लघुभिश्चित्रैरस्त्रैस्तानसुरान्रणेसायुधानच्छिनं राजञ्शतशोऽथ सहस्रशः
tato'haṃ laghubhiścitrairastraistānasurānraṇesāyudhānacchinaṃ rājañśataśo'tha sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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