महाभारत 3.167.4तच्छूलवर्षं सुमहद्गदाशक्तिसमाकुलम्अनिशं सृज्यमानं तैरपतन्मद्रथोपरिtacchūlavarṣaṃ sumahadgadāśaktisamākulamaniśaṃ sṛjyamānaṃ tairapatanmadrathopariइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें