महाभारत 3.168.28
सुसंगृहीतैर्हरिभिः प्रकाशे सति मातलिःव्यचरत्स्यन्दनाग्र्येण संग्रामे लोमहर्षणे
susaṃgṛhītairharibhiḥ prakāśe sati mātaliḥvyacaratsyandanāgryeṇa saṃgrāme lomaharṣaṇe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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