महाभारत 3.169.21
हतेष्वसुरसंघेषु दारास्तेषां तु सर्वशःप्राक्रोशन्नगरे तस्मिन्यथा शरदि लक्ष्मणाः
hateṣvasurasaṃgheṣu dārāsteṣāṃ tu sarvaśaḥprākrośannagare tasminyathā śaradi lakṣmaṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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