महाभारत 3.169.31
तत उक्तो भगवता दिष्टमत्रेति वासवःभवितान्तस्त्वमेवैषां देहेनान्येन वृत्रहन्
tata ukto bhagavatā diṣṭamatreti vāsavaḥbhavitāntastvamevaiṣāṃ dehenānyena vṛtrahan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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