महाभारत 3.17.24
अन्योन्यस्याभिसंक्रुद्धावन्योन्यं जघ्नतुः शरैःविनदन्तौ महाराज सिंहाविव महाबलौ
anyonyasyābhisaṃkruddhāvanyonyaṃ jaghnatuḥ śaraiḥvinadantau mahārāja siṃhāviva mahābalau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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