महाभारत 3.17.3
वर्जयित्वा श्मशानानि देवतायतनानि चवल्मीकांश्चैव चैत्यांश्च तन्निविष्टमभूद्बलम्
varjayitvā śmaśānāni devatāyatanāni cavalmīkāṃścaiva caityāṃśca tanniviṣṭamabhūdbalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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