महाभारत 3.170.14
त्रिदशेशद्विषो यावत्क्षयमस्त्रैर्नयाम्यहम्न कथंचिद्धि मे पापा न वध्या ये सुरद्विषः
tridaśeśadviṣo yāvatkṣayamastrairnayāmyahamna kathaṃciddhi me pāpā na vadhyā ye suradviṣaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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