महाभारत 3.170.28
ते वध्यमाना मद्बाणैर्वज्रवेगैरयस्मयैःपर्यभ्रमन्त वै राजन्नसुराः कालचोदिताः
te vadhyamānā madbāṇairvajravegairayasmayaiḥparyabhramanta vai rājannasurāḥ kālacoditāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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