महाभारत 3.170.32
नेमे शक्या मानुषेण युद्धेनेति प्रचिन्त्य वैततोऽहमानुपूर्व्येण सर्वाण्यस्त्राण्ययोजयम्
neme śakyā mānuṣeṇa yuddheneti pracintya vaitato'hamānupūrvyeṇa sarvāṇyastrāṇyayojayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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