महाभारत 3.170.66
अतिदेवासुरं कर्म कृतमेतत्त्वया रणेगुर्वर्थश्च महान्पार्थ कृतः शत्रून्घ्नता मम
atidevāsuraṃ karma kṛtametattvayā raṇegurvarthaśca mahānpārtha kṛtaḥ śatrūnghnatā mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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