महाभारत 3.176.24
सोऽहं परमदुष्कर्मा वसामि निरयेऽशुचौसर्पयोनिमिमां प्राप्य कालाकाङ्क्षी महाद्युते
so'haṃ paramaduṣkarmā vasāmi niraye'śucausarpayonimimāṃ prāpya kālākāṅkṣī mahādyute
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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